तैं सुइना तक्काेइ र: एकदिन्,साकार हाेइझान्ना
पन्नानमुणि कर्बरा तसाेइ ,आकार हाेइझान्ना
केद्दाेइ झा अफना गणा, खुनलाना: आँखर
धेकेइ मनि एकदिन तन, साभार हाेइझान्ना
टेउणि कट्यान काट्ट दिये, दुनियाँ त यिसी हाे
गैला शब्द चाखि सम्झद्या, आभार हाेइझान्ना
खाेकणि खाकणि शब्दन्, नाैनी निकाल्लि हाे
टेउणि कट्ट्या नाैनी घसि, लाचार हाेइझान्ना
थात जन भुलेइ गात जन भुलेइ, लागि रये धन्न
धैर्य गरेइ पाप धर्म, वारपार हाेइझान्ना
गजल (डाेट्याली भाषा)
रमेश पन्त मीतबन्धु
२०८०/३/२४









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